Tuesday, 2 October 2018

“हर चीज” का “आधार” है “मजबूत बुनियाद”

बेचैन हैं हवाएँ, सब ओर बेकली है,
कोई नहीं बताता, किश्ती किधर चली है?
मँझधार है, भँवर है या पास है किनारा?
यह नाश आ रहा, या, सौभाग्य का सितारा?
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“हर चीज” का “आधार” है “मजबूत बुनियाद”
1. चाय-ना में एक ऐसा बाँस का पेड़ उगता है जो बीज बोने, पानी, खाद सब कुछ देने के बावजूद पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवे साल में जमीन के अंदर ही अंदर सिर्फ और सिर्फ कुछ इंच (मात्र कुछ इंच) बढ़ता है.
(i) मकसद :- क्या कहीं, यह बाँस का पेड़, अपने को भविष्य के लिए बारिश, आँधी, तूफ़ान, धुप, छावँ या हर तरह की परिस्थिति में तैयार रहने के लिए तो, अपनी बुनियाद मजबूत नहीं कर रहा होता है ?
(ii) बाँस के पेड़ के बचपन से हम अपने बच्चों को कैसे निखार सकते हैं :-
(a) क्या इसी तरह 5th क्लास तक, जी हाँ 5th क्लास तक, हमें अपने बच्चों को 50 तरह के रटने वाले विषय न पढ़ा कर, सिर्फ और सिर्फ खेल खेल के जरिये SUPW, संगीत, योगा, हिंदी, इंग्लिश, मैथ्स (वैदिक) इत्यादि ही सीखा कर उनकी बुनियाद मजबूत नहीं करनी चाहिए ?
(b) 5th क्लास तक, 5 क्लास रूम के जरिये, कई स्कूल निम्नलिखित तरीका अपनाकर, अपने बच्चों की बुनियाद को सीमेंट से भी ज्यादा मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं :-
(i) पहले रूम में प्रोजेक्टर से कोई भी प्रोजेक्ट को दिखाना।
(ii) दूसरे रूम में जो चीजें दिखाई गई, वे चीजें बनवाना।
(iii) तीसरे रूम में अपनी बनाई हुई चीज को हिंदी में लिखना।
(iv) चौथे रूम में अपनी बनाई हुई चीज को इंग्लिश में लिखना।
(v) और पाँचवे रूम में सामने स्टेज पर खड़ा कर, सबके सामने अपनी बनाई चीज को इंग्लिश और हिंदी दोनों में प्रस्तुत करना।
2. छठे साल में यह बाँस का पेड़, एक दम से, 6 हफ्ते के अंदर ही अंदर, जी हाँ 6 हफ्ते के अंदर ही अंदर, 80 फुट का हो जाता है.
(i) मकसद :- अब यह बाँस का पेड़, लचीला रहते तथा इधर उधर झूमते गाते हुए, किसी भी तरह की बारिश, आँधी, तूफ़ान, धुप, छाँव यानि हर विपरीत परिस्थिति, हर तनाव को झेलने के लिए तैयार है.
(ii) इसके बाद 6th क्लास से हमारे बच्चे भी :- 
(a) अब जब एक बार हमारे बच्चों की बुनियाद, फौलाद से भी ज्यादा मजबूत हो गई है, तो अब उन्हें फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, हिस्ट्री, सिविक्स, जियोग्राफी, कॉमर्स, इकॉनोमिक्स, एकाउंट्स, कंप्यूटर या पचासों अन्य विषय भी पढ़ा दिए जाएँ, तो क्या फर्क पड़ता है.
(b) इसी तरह 5th क्लास तक अपने बच्चों की बुनियाद मजबूत होने के बाद, अब अगर हमारे बच्चे कोई भी काम धीरज, विश्वास, यक़ीन, दृढ़ता, तप के साथ करेंगे तो, वे अपनी जिंदगी के साथ साथ, अपने अपनों की जिंदगी में भी विकास, उन्नति और उजाला करेंगे, ये बात तय है.
बुनियाद जितनी मजबूत होगी, उसमें इमारत भी उतनी ही ऊँची और शानदार खड़ी होगी, ये बात हमें समझनी ही समझनी होगी.
जरा सोचिये :-
(a) क्या कहीं हम एक ही गलती तो नहीं कर रहे हैं कि 5th तक क्लास तक अपने बच्चों की बुनियाद मजबूत करने की बजाए, 12th के बाद उनकी बुनियाद मजबूत करना चाहते हैं ? ये तो वो हो बात हो गई कि पहले 12 मंजिला बिल्डिंग बना लेते हैं और फिर सबसे ऊपर बुनियाद डाल देंगे. अब हमें यह सोचना है कि, बुनियाद, 12 मंजिल बनाने से पहले जमीन में डालें या 12 मंजिल बनाने के बाद, छत के ऊपर डालें ???  
(b) क्या कहीं हम अपने बच्चों के साथ "बस किसी तरह से पास होकर डिग्री मिल जाये वाली एप्रोच" तो नहीं अपनाने की कोशिश कर रहे हैं क्योँकि अगर हम इस एप्रोच के साथ अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं तो आगे डिग्री मिलने के बाद नौकरी पर भी "हम सरकार को कोसेंगे या बाजार में अच्छी नौकरी न होने का प्रश्न चिन्ह लगायेंगे", इसमें कोई शक नहीं।
(c) क्या इसी तरह हमें भी किसी भी काम में पहले के पाँच साल उन कामों की सारी बारीकियों को समझते हुए नहीं देने चाहियें, जिससे की उसके बाद के अनगिनत साल हमें कभी भी किसी भी नए काम को करने में कम से कम कोई भी बुनियादी चीजों पर ध्यान न देना पड़े.
सोच है हमारी, आखिर अपने तथा अपने किसी करीबी के बच्चों के, शिक्षक के रूप में, भविष्य-कर्ता भी हैं हम ?
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रामधारी सिंह "दिनकर" जी की कुछ पंक्तियॉँ :-
बेचैन हैं हवाएँ, सब ओर बेकली है,
कोई नहीं बताता, किश्ती किधर चली है?
मँझधार है, भँवर है या पास है किनारा?
यह नाश आ रहा, या, सौभाग्य का सितारा?

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