मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैं।
हासिल कहाँ नसीब से होती हैं।
हासिल कहाँ नसीब से होती हैं।
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं।
जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ।
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जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ।
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इंसान "अपनी अपनी क्षमता" और "बाजार में उपलब्ध सामान" के हिसाब से अपने माता पिता के लिए, अपने लिए, अपनी पत्नी, अपने बच्चों या अपने रिस्तेदारों, दोस्त यारों के लिए "सबसे सर्वश्रेस्ट चीज" खरीदता हैं, ये इस दुनिया में आये हुए हर इंसान का जन्म से ही स्वभाव होता है.
इसमें "गरीब, अमीर, जात पात" का कोई लेना देना नहीं होता ….
इस दुनिया का हर इंसान जी हाँ हर इंसान "अपनी अपनी क्षमता" और "बाजार में उपलब्ध चीजों" के हिसाब से ही अपने लिए सबसे बढ़िया चीज ही खरीदता या देखता है …...
कुछ उदाहरण देखते हैं ……...
1) क्या हम अपने "बच्चों को पढ़ाने" के लिए "सबसे बढ़िया स्कूल, कोचिंग या शिक्षक" के पास नहीं भेजना चाहते ?
2) क्या हम घर में "खाने" के लिए "सबसे बढ़िया अनाज, सब्जी या फल" नहीं लाते ?
3) क्या हम "बीमार" होने पर "सबसे बढ़िया डॉक्टर" के पास नहीं जाते ?
4) क्या हम "मकान" बनाने के लिए "सबसे बढ़िया कांट्रेक्टर" को नहीं ढूंढ़ते ?
5) क्या हम "नौकरी" के लिए, अपने बच्चों को "सबसे बढ़िया कंपनी" में नहीं भेजना चाहते ?
6) क्या हम अपने बच्चों की “शादी” के लिए “सबसे बढ़िया रिश्ता” नहीं ढूंढते ?
7) क्या हम "आध्यात्मिक ज्ञान" के लिए "सबसे बढ़िया गुरु" नहीं खोजते ?
1) क्या हम अपने "बच्चों को पढ़ाने" के लिए "सबसे बढ़िया स्कूल, कोचिंग या शिक्षक" के पास नहीं भेजना चाहते ?
2) क्या हम घर में "खाने" के लिए "सबसे बढ़िया अनाज, सब्जी या फल" नहीं लाते ?
3) क्या हम "बीमार" होने पर "सबसे बढ़िया डॉक्टर" के पास नहीं जाते ?
4) क्या हम "मकान" बनाने के लिए "सबसे बढ़िया कांट्रेक्टर" को नहीं ढूंढ़ते ?
5) क्या हम "नौकरी" के लिए, अपने बच्चों को "सबसे बढ़िया कंपनी" में नहीं भेजना चाहते ?
6) क्या हम अपने बच्चों की “शादी” के लिए “सबसे बढ़िया रिश्ता” नहीं ढूंढते ?
7) क्या हम "आध्यात्मिक ज्ञान" के लिए "सबसे बढ़िया गुरु" नहीं खोजते ?
इसी तरह हर जगह क्या हम "अपनी अपनी क्षमता" और "बाजार में उपलब्ध सामान" के अनुसार "सबसे बढ़िया" लेने की कोशिश नहीं करते ?
जी हाँ बिलकुल करते हैं इसमें कोई शक नहीं क्योँकि ये सब हम "सिर्फ और सिर्फ" "अपने" लिए करते हैं…. इसी तरह
सबसे "बढ़िया" - "अपने लोग"
सबसे "बढ़िया" - "अपना घर"
सबसे "बढ़िया" - "अपनी कॉलोनी"
सबसे "बढ़िया" - "अपना प्रदेश"
और
सबसे "बढ़िया" - "अपना देश"
सबसे "बढ़िया" - "अपने लोग"
सबसे "बढ़िया" - "अपना घर"
सबसे "बढ़िया" - "अपनी कॉलोनी"
सबसे "बढ़िया" - "अपना प्रदेश"
और
सबसे "बढ़िया" - "अपना देश"
किसी ने सही कहा है :-
मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैं।
हासिल कहाँ नसीब से होती हैं।
हासिल कहाँ नसीब से होती हैं।
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं।
जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ।
जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ।
क्योँकि
क्या कभी हमने सुना है कि ... अंधेरों ने उजाला न होने दिया हो .......
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